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arun tiwari poem

आज का लेख, जलतरंग, पानी लेख, प्रकृति लेख

पानी प्रणय पक्ष

लेखक : अरुण तिवारी आतुर जल बोला माटी सेमैं प्रकृति का वीर्य तत्व हूं,तुम प्रकृति की कोख हो न्यारी।इस जगती का पौरुष मुझमें,तुममें रचना का गुण भारी।नर-नारी सम भोग विदित जस,तुम रंग बनो, मैं बनूं बिहारी।आतुर जल बोला माटी से…. न स्वाद गंध, न रंग तत्व,पर बोध तत्व है अनुपम…

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मैं देवदार का घना जंगल

लेखक: अरुण तिवारी मैं देवदार का घना जंगल,गंगोत्री के द्वार ठाड़ा,शिवजटा सा गुंथा निर्मलगंग की इक धार देकर,धरा को श्रृंगार देकर,जय बोलता उत्तरांचल की,चाहता सबका मैं मंगल,मैं देवदार का घना जंगल… बहुत लंबा और ऊंचा,हिमाद्रि से बहुत नीचा,हरीतिमा पुचकार बनकर,खींचता हूं नीलिमा को,मैं धरा के बहुत नीचे, सींचता हूं खेत को…

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