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क्या गंगा को सिर्फ चुनावी वाहन मानने वालों को अपना प्रतिनिधि चुनें ?

गंगा के सहारे चुनावी नौका पार करना, 2014 के प्रधानमंत्री पद के दावेदार श्री मोदी का एजेण्डा था। 2019 चुनाव में अब यह राहुल गांधी को प्रधानमंत्री बनाने की अपील करने वाली प्रियंका गांधी का एजेण्डा है।

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गंगा शहीदों की मांगों पर संकल्प कब ?Featured

सरकार का यह रवैया दुःखद है। क्या गंगा और गंगा बलिदानियों को लेकर प्रधानमंत्री जी के रवैये को हम जायज़ कह सकते हैं ? मां गंगा और भारत माता को लेकर हुई शहादत-शहादत में फर्क करने के हमारा रवैया कितना जायज़ है ? मांग है कि हम चुप्पी तोडे़ं। हम समझें कि गंगा की अविरलता की मांग, गंगा की सुरक्षा से ज्यादा हमारी सेहत, रोज़ी-रोटी, भूगोल, आर्थिकी, आस्था और भारतीय अस्मिता की सुरक्षा से जुड़ी मांग है। इसीलिए मांग है कि हम मुखर हों और शासन-प्रशासन को गंगा तथा गंगा की सुरक्षा के प्रति अनशतरत् संतानों के प्रति संवेदनशील और ईमानदार होने को विवश करें।

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पुलवामा घात में अमर हुए सी आर पी एफ के शहीदों को नमन करते हुए एक गंगा प्रश्न

उन को वंदन, उन पर क्रंदन,
बदला-बदले की आवाज़ें,
शत्-शत् करती मैं उन्हे नमन्,
पर इन पर चुप्पी कितनी जायज़,
खुद से पूछो, खुद ही जानो,
खुद का करतब पहचानो,
मैं गंगा तुम से पूछ रहीं…

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आज का लेख, नदी लेख

स्वामी सानंद इसलिए चाहते थे अविरल गंगा

अरुण तिवारी गंगा की अविरलता की मांग को पूरा कराने के लिए स्वामी ज्ञानस्वरूप सानंद ने अपने प्राण तक दांव पर लगा दिए। इसी मांग की पूर्ति के लिए युवा साधु गोपालदास आगे आये और अब इस लेख को लिखे जाने के वक्त तक मातृ सदन, हरिद्वार के सन्यासी आत्मबोधानन्द और…

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आज का लेख, नदी लेख, समय विशेष

स्वामी सानंद का गंगा स्वप्न, सरकार और समाज

लेखक : अरुण तिवारी 20 जुलाई, 1932 को जन्मे प्रो. गुरुदास अग्रवाल जी ने 11 अक्तूबर, 2018 को अपनी देहयात्रा पूरी की। वह पश्चिमी उत्तर प्रदेश के ज़िला मुजफ्फरनगर के कांधला में जन्मे। उत्तराखण्ड के ज़िला ऋषिकेश के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान में उन्होने अंतिम सांस ली।  उनकी एक पहचान ‘जी डी’…

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न्यू इण्डिया के नारे के बीच पानी, खेती और शहरों की तसवीर तथा बाजार व सरकार के रवैये को सामने रखती एक कविता

यह न्यू इण्डिया है…रचनाकार : अरुण तिवारी 1.  पानी बूंदा है, बरखा है,पर तालाब रीते हैं।माटी के होंठ तक कई जगह सूखे हैं।भूजल की सीढ़ी के नित नये डण्डे टूटे हैं।गहरे-गहरे बोर नेकई कोष लूटे हैं।शौचालय का शोर भी कई कोष लूटेगा।स्वच्छ नदियों का गौरव बचा नहीं शेष अब,हिमनद के आब तकपहुंच गई आग आज,मौसम की चुनौतीघर…

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समाज का प्रकृति एजेण्डा जगाती एक पुस्तक

पुस्तक का नाम: समाज, प्रकृति और विज्ञान लेखक:श्री विजयदत्त श्रीधर, श्री राजेन्द्र हरदेनिया, श्री कृष्ण गोपाल व्यास, डाॅ. कपूरमल जैन, श्री चण्डी प्रसाद भट्टसंपादक: श्री राजेन्द्र हरदेनियाप्रकाशक: माधवराव सप्रे स्मृति समाचारप संग्रहालय, एवम् शोध संस्थान, माधवराव सप्रे मार्ग (मेन रोड नंबर तीन), भोपाल (म.प्र.) – 462003संपर्क :  फोन: 0755-2763406 / 4272590,…

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गंगोत्री के हरे पहरेदारों की पुकार

लेखक: सुरेश भाई एक ओर ‘नमामि गंगे’  के तहत् 30 हजार  हेक्टेयर भूमि पर वनों के रोपण का लक्ष्य है तो दूसरी ओर गंगोत्री से हर्षिल के बीच हजारों हरे देवदार के पेडों की हजामत किए जाने का प्रस्ताव है। यहां जिन देवदार के हरे पेडों को कटान के लिये…

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NAPM निमंत्रण : ‘मुक्त बहने दो’ पुस्तक विमोचन तथा उत्तराखंड में भूमि का सवाल पर चर्चा

जन आंदोलनों का राष्ट्रीय समन्वय, उत्तराखंड                     कंडी खाल, पो0 आ0 कैम्पटी वाया मसूरी, टिहरी गढवाल, उत्तराखंड–248179      09718479517, 9927145123 निमंत्रण 10 जून, 2017 शनिवार   समय- 11 बजे से 3.30 तकस्थान- जैन धर्मशाला, निकट प्रिंस चौक, देहरादून, उत्तराखंड  प्रिय साथी , जिंदाबाद!!    बांध परियोजनाओं को उत्तराखंड में विकास के लिये प्रचारित किया गया है। पर्यावरण…

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