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अरुण तिवारी

आज का लेख, नदी लेख, समय विशेष

मां गंगा जैसी कोई नहींFeatured

12 जून, 2019 – गंगा दशहरा पर विशेष

यह है गंगा का गंगत्व; भारतीय संतानों के लिए मां गंगा का योगदान।

अब दूसरा चित्र देखिए और सोचिए कि गंगा आज भी सुमाता है, किंतु क्या हम भारतीयों का व्यवहार माृतभक्त संतानों जैसा है ?

सच यह है कि गरीब से गरीब भारतीय आज भी अपनी गाढ़ी कमाई का पैसा खर्च कर गंगा दर्शन को आता है, लेकिन गंगा का रुदन और कष्ट हमें दिखाई नहीं देता। गंगा के साथ मां का हमारा संबोधन झूठा है। हर हर गंगे की तान दिखावटी है; प्राणविहीन ! दरअसल हम भूल गये हैं कि एक संतान को मां से उतना ही लेने का हक है, जितना एक शिशु को अपने जीवन के लिए मां के स्तनों से दुग्धपान।

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आज का लेख, समय विशेष

…पर पानी संजोना कब मना है ?

समाज ने यह मान लिया है कि पानी का इंतज़ाम करना, सरकार का काम है; वही करे। इस चित्र को उलटना होगा। न भूलें कि बारिश आती है, तो वह किसी की प्रतीक्षा नहीं करती। हम भी न करें।

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आज का लेख, जलतरंग

तब हर पल होली हो जाता है…

अरुण तिवारी जब घुप्प अमावस के द्वारेकुछ किरणें दस्तक देती हैं,सब संग मिल लोहा लेती हैं,कुछ शब्द, सूरज बन जाते हैं, तब नई सुबह हो जाती है,नन्ही कलियां मुसकाती हैं,हर पल नूतन हो जाता है,हर पल उत्कर्ष मनाता है, तब मेरे मन की कुंज गलिन मेंइक भौंरा रसिया गाता है,पल-छिन…

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Uncategorized, आज का लेख, जलतरंग, नदी लेख

पुलवामा घात में अमर हुए सी आर पी एफ के शहीदों को नमन करते हुए एक गंगा प्रश्न

उन को वंदन, उन पर क्रंदन,
बदला-बदले की आवाज़ें,
शत्-शत् करती मैं उन्हे नमन्,
पर इन पर चुप्पी कितनी जायज़,
खुद से पूछो, खुद ही जानो,
खुद का करतब पहचानो,
मैं गंगा तुम से पूछ रहीं…

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